तुम्हारे आने से 

पाषाणों से निकले राग

तुम्हारे आने से 

तपन ने दे दी शीतल छाँव 

तुम्हारे आने से मन के

शांत सरोवर में हुई हलचल 

तुम्हारे आने से 

रिक्तिता में दी रोशनी ने दस्तक 

तुम्हारे आने से मानों 

जिंदगी ने ली हो करवट

और फिर 

तुमने ही तो सिखाया था

दिनकर को मधुर होना

व्योम को तपना

पुष्पों को खिलखिलाना

कोयल ने स्वर छेड़े

झरनों ने मधुर संगीत बजाये 

सावन ने मल्हार गाये

और बहारों ने किया नृत्य

तुम्हारे आने से

यूँ तो ,

बहुत कुछ बदला 

जीवन में 

जैसे भूख-प्यास,

नींद-रूदन 

ख्वाब-खयालात, 

और भी बहुत कुछ

तुम्हारे आने के बाद 

हाँ,  

नहीं बदला तो 

श्वासों का आवागमन 

एकांत में मौन होना

भीङ मे गुनगुनाना

पंछियों को निहारना 

आसमा को घंटों ताकते रहना

गंगा घाट पर लहरों का संगीत सुनना 

और उसी घाट की सीढियों पर बैठ 

तुम्हारे लिए कविताएँ गढना

देखकर लोगों की पीङा

आंखो का नम हो जाना

चाहकर भी मेरा

पत्थर सा ना बन पाना

जीवन का भावार्थ 

तुमसे ही सीखा मैंने 

जिंदगी क्या है इसके मायने 

तुम्हीं से जाना मैंने

लघु हृदय का भौगोलिक क्षेत्र कितना विस्तृत है 

मन की गहराई को आंक कर समझाया था तुमने ही

तुमसे ही सीखा था मैंने

आँखे बोलती भी हैं

तुमसे ही सीखा मैंने 

बेलफ्ज खामोशियों को पढना

तुमसे ही तो जीवन में

प्रेम के विज्ञान और गणित से अवगत कराया था 

तुमसे ही तो 

दूरियों में नजदीकीयों का आभास कराया था 

और फिर तुमसे ही तो जीवन में

प्रेम का सदाचार भी सिखाया था

तुमसे ही तो कहा था 

प्रेम एक पूजा है

त्याग उसके पुष्प, 

आँखो से बहती नीर ज्योति 

और विरह आरती है ।

तुम्हारे आने से बहुत कुछ 

सीखा, जाना और समझा मैंने ।।

और 

फिर एक दिन....

अचानक 

चुपचाप चले गए 

जीवन से तुम 

हो गया पुनः सबकुछ 

पहले की तरह

जैसा था 

तुम्हारे जीवन में आने से पहले ।।