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विलोम पक्ष में सदा समक्ष आ मिले अहा।

कि एक छोर ने तभी अधीरता लिए कहा!

न गाँठ के बिना जुड़ाव हो सका जुड़ाव में।

स्वतंत्र रूप से कहो कि कौन प्रेम भाव में,


अनंत के अनंत व्यास पर बँधा कलाव सा।

बँधो परंतु शेष भाग छोड़ दो लगाव सा!


प्रणय कुमार की

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