
आंसू की दो बूंदें, आंखो से आज बहा दो।
सर झुकाकर शहीदों को,श्रद्धा सुमन चढा दो।
इमारत ये आजादी की कुर्बानी पर ही खड़ी है।
भारत माता को बचाने, नहीं जान की पड़ी है।
हर कोम ने दी शहादत, गौरव गाथा ये सुनादो।
सर झुका कर शहीदों को ...
पत्थर सा सीना लेकर,दुश्मन की गोली खाई।
अंगारों परही चलके,फिर जानकी
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