कोशिकाओं से बने शरीर के
क्रोध में टुकड़े हज़ार कर देता हूॅं
अनगिनत मिन्नतें माॅंगकर
फ़रिश्ते जो मुश्किल से हुए
उन्हें बेझिझक
कफ़न में बाॅंध देता हूॅ
रस्ते में चलते मासूमों को
बेरहमी से कुचल देता हूॅं..
लूटपाट भी करता हूॅं शरीर का
वस्तुओं का केवल
जान ही नहीं लेता हूॅं ..
विवेकहीन अविकसित मानव हूॅं
अकालअपमृत्यु का वर देता हूॅं..
अवांछित नवजात शिशु को
कहीं भी त्याग देता हूॅं..
अपने सुख के लिए दूसरों के
मन व शरीर को पीड़ा देता हूॅं..
आराम पाने के लिए अपनों को
संस्थानों में छोड़ देता हूॅं..
जल्लाद नहीं यम या दानव नहीं
विवेकहीन अविकसित मानव हूॅं
अकालअपमृत्यु का वर देता हूॅं..