जिंदगी

कभी झूठे ख्वाब दिखती है जिंदगी

कभी हकीकत से मिलती है जिंदगी

कभी पक्षी सा उड़ती है जिंदगी

कभी धूल में मिलती है जिंदगी

कभी लगे सतरंगी है जिंदगी

कभी बेरंग हो जाती है जिंदगी

कभी भीड़ से रिश्ता बनती है जिंदगी

कभी भीड़ में अकेली हो जाती है जिंदगी

माना नहीं बोलती है जिंदगी

लेकिन इशारों से सब बताती है जिंदगी

आखिर इतनी क़ीमती क्यों है जिंदगी

मौत तुझे क़ीमती बनती है जिंदगी

यूँ तो जिन्दगी भर सफ़र निभाती है जिंदगी

लेकिन पल भर मे साथ छोड़ जाती है जिंदगी

~ राहुल शर्मा