ना खेत ना खलिहान ना घर ना दुकान चाहिए
जिसने ये दिवार खड़ी की मुझे उसकी जान चाहिए
जिसने हमे बांटा उसकी गवाही नही मंजूर
जो बंट गए मुझे उनका बयां चाहिए
मंदिर मस्जिद जिसे ढूंढ रहा है तु
उस खुदा को धरती पर इंसान चाहिए
इतने सस्ते मे कैसे बेच दूॅ अपना ईमान मै
थोड़ा ज्यादा दो मुझे शहर मे मकान चाहिए
थक गया हूँ दुनिया की भाग दौड से
आराम के लिए अब श्मशान चाहिए ।