Poetry 1 min read 615.7K reads

समझ


मैं जो नहीं बोल रहा तु वो बात समझबाहर अपनों की तरह मिलता हैकभी घर आ के मेरे हालात समझमुठ्ठी भर जूगनु उजाला किए हैंतू उम्मीद समझ या रात समझकहां ढूंढोगे एक थाना शिकायत के लिएजहां को तू एक हवालात समझ

Read more Earn more Learn more