इश्क ना सही बात दुबारा कर लें

मन में जो है उसका उतारा कर लें

एक फांस सी फंसी है अभी भी कहीं

आज हंस कर किनारा कर लें


ठहरा के मन को मैला क्यों करे

इसको बहती हुई धारा कर लें


हाथ थामने की उम्मीद दुनिया में नहीं

बातों से बात का सहारा कर लें


भरी महफिल में मुलाकात मुनासिब ही नहीं

जुल्फ के बहाने आँख का इशारा कर लें


अंधेरी रात में आसमां को क्या ताकें

खुद को घिस के सितारा कर लें


सब ख्वाहिशों का तो पता नहीं

मौत के बाद भी जो चुभे

उनका तो निपटारा कर लें