खुद से भी बातें करता था जो कभी

भरी भीड में भी चुप है

वजह उसकी आँखों में है

चेहरे पर भी है

पर

वो परेशान है इससे अधिक मैं समझ ना सका

मैं समझ ना सका

ये किसी के खोने या जाने का गम नहीं


ना ये किसे से लुटने या

कुछ टूटने का दुख है


ना ये इच्छा और आकांक्षाऔं

की घुटन है


ये अंधेरा अंदर है

कारण अकारण भी हो सकता है

अकारण कारण भी हो सकता है


ये सिहरन या डर पैदा नहीं करता

ये एक शून्य है

जो बहुत बढा हो जाता है


और फिर महसूस होता है

ब्लैक होल की तरह जो समेट लेता है

और फिर घुप अंधकार