किसे से आंसू छुपा लेता हूं
किसे से हंसी छुपा लेता हूं
हुनरमंद हूं बडा
गम में गम और खुशी में
खुशी छुपा लेता हूं
मुझे जानने का दावा न कर
मैं खुद से खुद के राज छुपा लेता हूं
स्याह धब्बों से सज्जी है मगर
मैं निगाहों से कभी दाग
कभी दामन छुपा लेता हूं
तुने क्या कहा, क्या किया
हर बात पता है मुझको
कभी अपना तो कभी गैर समझ
अपने जज्बात छुपा लेता हूं
ये अदा जमाने तुझसे ही सीखी है
झूठ को सच
सच को झूठ की तरह छुपा लेता हूं
रंग बदलना अभी भी फितरत नहीं
बस जो छुपाना होता है
छुपा लेता हूं
