मेरे छत पर भी कलियाँ रोज खिलती है मगर मैं भवरा नही हूँ, नज़रों से इश्क़ करता हूँ मगर मैं काजल नही हूँ, आँखों से बरसता रोज सावन है मगर मैं बादल नही हूँ, इश्क़ करता हूँ आशिक़ हूँ मगर मैं पागल नही हूँ।