तुम ही कहो.. चलूँ और के रुक जाऊँ।   वक्त वहीं पे ठहरा हुआ है, राहों में सन्नाटा सा पसरा हुआ है, कदम लड़खड़ा रहे हैं और ज़िगर जबरा हुआ है,   अब तुम ही कहो.. चलूँ और के रुक जाऊ!   तुझमे सिमट जाऊँ या तेरी यादों में बिख़र जाऊँ, तकता रहूं तुझे कि बनके घटा बरस जाऊँ, तेरा होके तुझमे समा जाऊँ, साँसे चलने दूँ या थम जाऊँ,   तुम ही कहो अब.. चलूँ और के रुक जाऊँ!   तुझ बिन एक पल भी कैसे बिताऊँ, तेरी नज़र से उतर कर कैसे जी जाऊँ, इस दिल में बसा तू ही तू है, तुझसे जो किया वो प्यार किसी और से कैसे कर जाऊँ, साँसों में बसा कर तुझे तुझसे दूर कैसे हो जाऊं,   तुम ही कहो.. चलूँ और के रुक जाऊँ!   साथ चलोगे या अकेले ही चला जाऊ, हमसफ़र बनोगे या तनहा ही गुजर जाऊँ, अकेला हूँ कही थक न जाऊँ, चलो ना संग_₹j ज़िन्दगी मैं भी जी जाऊँ,   तुम ही कहो अब.. चलूँ और के रुक जाऊँ!