अरमान मेरे अब सीने में कांटों से चुभते हैंहर एक सांस संघ और दर्द दिल को देते हैंउनसे मिलना इतना ही की अब खामोश हूं,जब भी मिलते हैं हम मोन सा ओढ़ लेते हैं
अरमान मेरे अब सीने में कांटों से चुभते हैंहर एक सांस संघ और दर्द दिल को देते हैं
उनसे मिलना इतना ही की अब खामोश हूं,जब भी मिलते हैं हम मोन सा ओढ़ लेते हैं