तेरी याद जब भी आती है
आँखों में आंसू दे जाती है
एक पल भी दूर रहा नही जाता
हर पल खुद को तन्हा हूँ पाता
याद आती हैं तेरी वो अनकही बातें
भूली नही जाती वो अनजानी रातें
तू मुजमे या मैं तुझमे समझ नही आता
आइना देखु तो उसमे खुदको नही पाता
तेरा अक़्स मेरी आँखों से नही जाता
बंद आँखों में भी तू ही नज़र है आता
तुजसे दूर शायद ज़िंदा ना रह पाउँगा
इस ज़िन्दगी में तो तुजे भूल न पाउँगा
मुमकिन नही कि किसी और से प्यार हो जाये
हरगिज़ नही की किसी और से इजहार हो जाये
तू समझती है मेरी मोह्हबत को नादानी
एक दिन ये आशिक़ दे देगा तुजे कुर्बानी
इश्क़ मेरा मुक्कमल हो नही सकता
और तेरे बिना मैं कभी जी नही सकता