बारिश में रोने का मन करता है आँसू खुद के छुपाने को मन करता है भूल जाऊ वो सारे यादों के मंज़र यादाश्त के खो जाने को दिल करता है फिर से बचपन मे जाने को जी करता है फिर से मासूम हो जाने को जी करता है कभी रेत पे नंगे पांव चलने का मन करता है तो कभी पेड़ की छाओ में बैठने का मन करता है कागज की नाव चलाने का मन करता है तो कभी यूँ ही कुछ बाते करने का मन करता है आओ बैठिये कुछ याद करे उन भूली बिसरी यादों को भूल गए है जो हम उन बचपन की बातों को।।