जिंगदी फिर से भटक जाएगी किस्मत फिर से कहर ढायेगी   सब कुछ फिर से बिखर जाएगा जाने ये मौका फिर कब आएगा   छूट जाएगा उम्मीदों का दामन पतझड़ हो जाएगा सारा सावन   रो पड़ेगा ये दिल फिर से मन नही लगेगा कहीं फिर से   मत करना अब कोई और ज़ुल्म मानूँगा, होगा अब जो भी हुक़्म   उम्मीद इस बार परवान चढ़ा देना मंजिल से इस बार मुजे मिला देना   छूट गयी थी कभी जो राहें पता उनका फिर से बतला देना   शायद यही सफ़र अब किस्मत में है एक उम्मीद अब मेरी हिम्मत में है