आँखों में अश्को का तूफ़ान लेकर चलता हूँ मैं अपने दिल में,अनकही दास्तान ले कर चलता हूँ | इंसानों की भीड़ में,अब मैं तन्हा हो कर चलता हूँ मैं अपने साथ,यादों का कारवां ले कर चलता हूँ | जिस हमसफ़र ने मेरे हांथो को बीच सफर में छोड़ दिया मैं उस हमसफ़र का रंज-ओ-ग़म साथ ले कर चलता हूँ | मैं चलता हूँ की चलना हीं मुशाफिर का काम है चुप-चाप ही सही,पर सदा सही रास्तो पर चलता हूँ | अब न कोई दिल में रंजिश है, ना हीं किसी की जुस्तजू है लड़खड़ाकर हीं चलता हूँ, पर अब मैं सिर्फ अपनी मंज़िल की ओर चलता हूँ | आँखों में अश्को का तूफ़ान ले कर चलता हूँ में अपने दिल में, अनकही दास्तान ले कर चलता हूँ ||