कभी गुमशुदा तो कभी लापता

कभी खुशनुमा तो कभी गमज़दा

वाह री ज़िन्दगी! अब तू ही बता

क्या है तेरी इल्तिज़ा...


कभी बेजुबान तो कभी बेलगाम

कभी शब्दहीन तो कभी कोहराम

वाह री ज़िंदगी! अब तू ही बता

क्या है तेरा एहतमाम..


कभी बदमिज़ाज तो कभी बद लिहाज़

कभी ऐतबार तो कभी ऐतराज़

वाह री ज़िंदगी!अब तू ही बता

क्या है तेरी दरख्वास्त

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एहतमाम(प्रबंध/व्यवस्था)