उम्मीद ही दुखों का कारण

उम्मीदों से ही मन होता अशांत है

औरों से आशा करते करते

ख़ुद के वजूद का

हो जाता देहांत है


उम्मीद ही बेचैनियों का सबब

उम्मीदों से ही हर इक अजाब है

दूजों की राह ताकते ताकते

बुझ जाते ख़ुद की

आँखों के ख़्वाब हैं


उम्मीद ही बेक़रारी की वजह

उम्मीदों से ही दिल ए बेताब है

औरों की हरदम सुनते सुनते

ज़िंदगी हुई जाती

ख़ुद के खिलाफ़ है

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अज़ाब (दर्द/पीड़ा)