तुम हो मधुर संगीत अगर
तो मैं तुम्हारी धुन हूं
संग तुम्हारे रहते हुए भी
हरपल तुम्हीं में गुम हूं
तुम हो दिल ए मोहब्बत अगर
तो मैं प्रेम की स्पंदन हूं
संग तुम्हारे जुड़ी हुई
इक अटूट सा बंधन हूं
तुम हो ख़ामोश लब अगर
तो मैं गहरे अल्फाज़ हूं
पढ़ सके जो मौन तुम्हारा
एहसासों की वो किताब हूं
तुम हो अप्रीतम प्रेम अगर
तो मैं जज़्बातों की सागर हूं
संभाले ख़ुद में हर भाव तुम्हारा
अथाह स्नेह की गागर हूं
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