तस्वीरें कहाँ वजह पूछती है

कम से कम उनमें तो मुस्कुराया जाए ..

वक़्त कहां कभी किसी के लिए रुकता है

लम्हों को बेपरवाह बुना जाए...

यादों का झोंका कहां आने से रुकता हैं

फिज़ा से ख्वाबों को निचोड़ा जाए...

आवाज़ में सिलवटें कहां दिखती हैं

खामोशी का लुफ्त उठाया जाए...

लिखावट कहां वजह पूछती है

अल्फाजों के रंगों से तुझे काग़ज़ पर सजाया जाए...

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