तलाश में हूं ख़ुद की
मगर अबतक नाकाम हूं "मैं"
मुक़म्मल दास्तां नहीं
अधूरा मुकाम हूं "मैं"...
तलाश में हूं ख़ुद की
मगर अबतक फ़िराक़ में हूं "मैं"
ग़फ़लत में पल रहे हैं रिश्ते
और होशोहवास में हूं "मैं"...
तलाश में हूं ख़ुद की
मगर अबतक हताश हूं "मैं"
सुकून ए मंज़िल नज़रों से ओझल है
और काश की आस में हरपल
व्यतीत होता निराश हूं "मैं"
✍️✍️
फ़िराक़(सोच/चिंता)


