कभी कभी खुद से भी बात करनी चाहिए
दिल के जज़्बातों से एक ऐसी मुलाक़ात करनी चाहिए..
मन को जायज़ और नाजायज़ के द्वंद्व से निकालने का प्रयास करना चाहिए
कभी कभी हृदय को भी ऐसा एक अवसर प्रदान करना चाहिए..
खुद की मायूस भावनाओं का मनुहार करना चाहिए
अपने अंदर छुपी वेदनाओं को भी प्यार से पुचकार लेना चाहिए
खुद से खुद तक का सफर हर रोज़ होना चाहिए
कुछ और हो ना हो खुद के हर वितर्क का तर्क होना चाहिए
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