खामोशियों के आसमान को
चलो लफ़्ज़ों के
सितारों से सजाते हैं
बेचैनियों के माथे पर चलो
सुकून का चाँद टाँग आते हैं
मौन से पसरे अंधकार को
चलो खनक के उजाले ओढ़ाते हैं
फिज़ाओं में बिखरी तन्हाईयों को
चलो जुगनूओं की रौनक पहनाते हैं
थकान से बोझिल आँखों को
चलो राहत की नीदें दे आते हैं
उदासियों से बोझिल पलकों पर
चलो चिरागों के ख़्वाब सजाते हैं
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