सवालों का जवाबों से 

बहुत पुराना रिश्ता है

जाल में प्रश्नों के 

उत्तर आ फसता है


लफ़्ज़ों का काफ़िला 

ज़ुबान पर जा अटकता है

दिमाग की कारीगरी

दिल कहां समझता है


विचारों का कारवाँ जब

जज़्बातों से जा उलझता है

जवाबों का अक्स 

सवालों में झलकता है

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