प्यार के साए में पलता समर्पण
क्षणभंगुरता के सांचे में ढुलकता आकर्षण
विश्वास के सांचें में ढलता समर्पण
शक के दायरे में सिमटता आकर्षण
तन और मन का समागम समर्पण
क्षणिक सुख का आडंबर आकर्षण
शुद्ध हृदय और निःस्वार्थता का दर्पण समर्पण
झूठ और फरेब का प्रलोभन आकर्षण
प्रेम और स्नेह को उपजाता समर्पण
ईर्ष्या और द्वेष को बढ़ाता आकर्षण
राधा और मीरा का कृष्ण के प्रति प्रेम समर्पण
विश्वामित्र की तपस्या का मेनका द्वारा भंग होना आकर्षण
✍️✍️


