रिश्ते कोई व्यापार नहीं

इसे मुनाफों और नुकसान

के आधार पर मत आँकिए

समझ ना आए जो दूसरे

के जज़्बात कभी

तो पहले ख़ुद के

भीतर झांकिए


रिश्ते कोई न्यायालय नहीं

इसे सही और गलत

के फ़ैसलों पर मत आँकिए

समझ ना आए जो दूसरे

के हालात कभी

तो पहले ख़ुद के

विचारों को भाँपिए

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