पेड़ काट काट कर शहर बसा दिए

सादगी की भूमि पर आडंबर बैठा दिए


स्नेह और आत्मीयता की उपजाऊ ज़मीन पर

ईर्ष्या और दंभ के खंडहर बसा दिए

नर्म और भावुक छप्परों को कर ध्वस्त

सख़्त और निर्दयी ईंटों के महल सजा दिए


पीपल और बरगद के छांव भरे दरख्तों को काट कर

बेजान और निर्जीव मकान बना दिए

सुकून और शीतलता बरसाते वृक्षों को उखाड़कर

बेचैनियाँ और तपन बरपाते खोखले ढांचे बना दिए


पेड़ काट काट कर शहर बसा दिए

ताज़गी भरी हवाओं को बिसरा

घुटन से परिपूर्ण बनावटी वातानुकूलित

माहौल अपना लिए

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