इंसान को इंसान ना समझने वालों ने

पत्थर को भगवान बना डाला

मानवता को कर घृणित

निर्दयता को ख़ुद का ईमान बना डाला


इंसानियत को कर परे

हैसियत को खुद का गुमान बना डाला

पैरों में डाल रूढ़िवादी परम्पराओं की बेड़ियां

खुद को दोहरी मानसिकता का गुलाम बना डाला


ईमानदारी का चोंगा ओढ़

कुटिलता को ख़ुद का अभिमान बना डाला

वफ़ादारी और नैतिकता को पूर्णरूप से कर परे

मानव जाति को अकृतज्ञता और

असभ्यता की पहचान बना डाला

✍️✍️