परख कर ना देखिए 

यूं हर जज़्बात को

होता नहीं रूबरू 

उजाला भी आधी रात को


शख्सियत का किसी की 

यूं मज़ाक मत बनाईए 

किसी और को गिराकर

ख़ुद को मत उठाईए


होता है हर शख़्स यूं तो

ख़ुद में लाजवाब

महज़ हैसियत को 

इज्ज़त नवाज़ने का 

माप मत बनाईए

✍️✍️