दूसरों को आईना दिखाने वालों ने

सच का दामन कबसे छोड़ रखा है

औरों की खूबियों को कर बदनाम

ख़ुद की कमियों का पन्ना मोड़ रखा है


पोशाकों की सफ़ेदी की आड़ में

मन की मैल को भिगोए रखा है

औरों की शराफ़त को ठहरा दाग़दार

ख़ुद के अंदर गुनाहों का

हुजूम संजोए रखा है

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