कभी अंजान दुनिया में ले जाती

तो कभी मस्तिष्क को अचंभित कर जाती


कभी करवटों में उलझाती

तो कभी आंखों में सिमट जाती


कभी गमों के सागर में ले जाती

तो कभी ख्वाबों की दुनिया की सैर कराती


कभी हकीकत को धुंधलाती

तो कभी अर्धचेतन की स्थिति दे जाती


कभी पूरे दिन की थकावट को थपथपाती

तो कभी अंतर्मन को झंझोर जाती


नींद तू अजीब सी पहेली जो...

आ जाए तो सुकून का बिस्तर दे जाती

और ना आए तो व्यर्थ की बेचानियों

के जाल में उलझा जाती

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