करने को तो बातें हज़ार हैं
पर नज़रअंदाज़ करने की अदा की
आज भी सबसे तेज़ धार है...
बेसबब ही रिश्ते शर्मसार हैं
वो नादान है जो नासमझे
की ये गलतफहमियों का रचा माया जाल है...
ये भाव अत्यंत दुखदाई है
क्योंकि ये एक भावनाओं की
गहरी खाई है...
इसका परिणाम भर देता है मन में द्वेष
और पीछे छोड़ जाता है भावों का कलेश...
हरवक्त नज़रअंदाज़ करने की होती नहीं कोई वजह
फिर भी मिलती है अंतर्मन के जज्बातों को बेमतलब की सज़ा
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