जीवन की अनंत अभिलाषाओं के बीच

मुझे चांद छूना था

रात की सीढ़ी पर चढ़कर

सफर पर निकल पड़ी 

काले बादलों का तूफ़ान था

बिजली सा चमकता आसमान था

हाथ कुछ तारे लगे 

जो धरा को छूते ही 

जुगनू हो गए

लेकिन ज़िन्दगी को अपनी रोशनी से 

टिमटिमा गए✨✨

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