मनचाहा बोलने के लिए 

अनचाहा सहने की ताक़त होनी चाहिए..


मुंह अगर जो कोई फुलाए

तो प्रेम से मनाने की चाहत होनी चाहिए..


अपना जो कोई दूर चला जाए

तो वापस बुलाने की शिद्दत होनी चाहिए...


मन जो कभी नाज़ुक भावों से भर जाए

तो भावनाओं को सहलाने की कला होनी चाहिए...


इम्तिहान की घड़ियां जो कभी आ जाएं

तो हाथों में मज़बूत इरादों की लगाम होनी चाहिए...


विचारों के उलझे तारों को जो सुलझा जाए

अंतर्मन में ऐसी चेतना होनी चाहिए

अंतर्मन में ऐसी चेतना होनी चाहिए

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