मन से बड़ा ना साथी कोई
मन से बड़ा ना बैरी
मन ही मन को बांधता
मन ही मन का प्रहरी...
मन से बड़ा ना रिश्ता कोई
मन से बड़ी ना रीत
मन ही मन को जानता
मन ही मन का मीत...
मन से बड़ी ना आशा कोई
मन से बड़ी ना पीड़
मन ही मन को उभारता
मन ही मन का पीर
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प्रहरी(पहरेदार)पीर(गुरु)


