दर्द में होते हुए भी ना जाने कैसे

मुख पर मुस्कान सजाए रहती है

परेशानियों में होते हुए भी ना जाने कैसे

माथे के शिकन छुपाए रहती है


आंखों में आसूं भरे होने पर भी न जाने

कैसे खिलखिला लेती है

उदासियों की रेखाओं को ना जाने कैसे

अपने आंचल में छुपा लेती है


अंदर से बिखरी होकर भी ना जाने कैसे

सबको और सबकुछ संभाल लेती है

कमाल की कारीगर है मेरी मां

जो उधड़ी हुई सी मेरी जिंदगी को

स्नेह और ममता के धागों से

रफू कर झट से संवार देती है

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