मैं ख़ुद के लिए ख़ुद ही नायाब हूं

आंखों में पनपता इक अधूरा ख़्वाब हूं


नामुक़म्मल हसरतों का मुक़म्मल हिसाब हूं

ज़िंदगी के उलझे सवालों का

सुलझा हुआ सा जवाब हूं


नफरतों और तोहमतों की दुनिया में

ज़िंदादिली और खुशमिजाजी का आगाज़ हूं

जो भी हूं जैसी भी हूं मगर खुद के लिए

बेहद,बेइंतहा और बेहिसाब हूं

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