दर्द देकर आंसुओं पर सवाल करते हैं

लोग भी कभी कभी सच में कमाल करते हैं


आवाज़ छीनकर खामोशियों पर सवाल करते हैं

लोग भी कभी कभी सच में कमाल करते हैं


बेईमानियों की महफ़िल में शराफ़त का माखौल करते हैं

लोग भी कभी कभी सच में कमाल करते हैं


खुद दाग़दार होकर औरों के अस्तित्व पर सवाल करते हैं

लोग भी कभी कभी सच में कमाल करते हैं


मुंह पर अच्छे होने का स्वांग रच,

पीठ पीछे वार करते हैं

लोग भी कभी कभी सच में कमाल करते हैं

लोग भी कभी कभी सच में कमाल करते हैं

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