लफ़्ज़ों की कारीगिरी भी 

क्या कमाल ढाती है

शांत से बैठे मन में

भावों का भूचाल लाती है


धड़कनों की रफ़्तार को 

कुछ यूं बढ़ाती है

एहसासों को पल भर में

लबों से बयां कर जाती है


शब्दों की सुगंध

दिल को कुछ यूं लुभाती है

सूनी पड़ी बगिया जज़्बातों की

मिनटों में महक जाती हैं

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