समय की चाल देखूं
या लफ़्ज़ों की ढाल देखूं,,
देखूं भावों का प्रवाह
या तल्खियों का वार देखूं

हकीकतों के बोझ देखूं
या ख्वाबों की बयार देखूं,,
देखूं जिम्मेदारियों का कलह
या बेफ़िक्री की परवाज़ देखूं

दिखावों की दुनिया देखूं
या यथार्थ का कमाल देखूं,,
देखूं मीठी चालाकियां
या कड़वी नादानियां देखूं

अपनों के वार देखूं 
या गैरों का प्यार देखूं,,
देखूं लबों की मुस्कान
या आसुओं की धार देखूं!!
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