कुछ दर्द हुए बयां
तो कुछ सीने में क़ैद हुए
कुछ दर्द हुए रिहा
तो कुछ सीने में मुस्तैद हुए
कुछ दुःख हुए जुदा
तो कुछ सीने में क़ैद हुए
कुछ दुःख बने दवा
तो कुछ ज़हर हुए
कुछ लम्हें हुए मरहम
तो कुछ ज़ख्मों से हरे हुए
कुछ लम्हें हुए निकट
तो कुछ अपनों से ग़ैर हुए
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