कुछ लोगों की बेरुखियों ने बदल डाला

तो कुछ अपनों की नजरंदाज़ी ने

कुछ हालातों की बेबसी ने बदल डाला

तो कुछ रिश्तों की नाराज़गी ने


कुछ वक्त की पाबंदियों ने बदल डाला

तो कुछ अनमने से बंधनों ने

कुछ अपनों के तंजों ने बदल डाला

तो कुछ घात देते संबंधों ने


अब अखरते हैं लोगों की आंखों में

तो किंचित् भी फ़र्क न पड़ता है

जीते थे जिनके मुताबिक़ कभी

अब उनको हमारा बदलना अखरता है

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