कुछ ख़्वाब टूटे टूटे हैं
कुछ अपने रूठे रूठे हैं
कुछ यादें भीनी भीनी हैं
कुछ बातें सीली सीली हैं
कुछ रिश्ते झूठे झूठे हैं
कुछ नाते छूटे छूटे हैं
कुछ आंखें भीगी भीगी हैं
कुछ लफ्ज़ डूबे डूबे हैं
कुछ वक्त ठहरा ठहरा है
कुछ एहसास गहरे गहरे हैं
कुछ जज़्बात बिखरे बिखरे हैं
कुछ हम भी उखड़े उखड़े हैं
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