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जाते नहीं छोड़कर

Roopali Trehan SrivastavaRoopali Trehan Srivastava April 29, 2022
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जाते नहीं छोड़ कर

शिकवे हों या जज़्बात

शूल की तरह चुभते हैं

अपनों के दिए हुए घात


भूले नहीं भुलाते

दर्द भरे लम्हात

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