तन्हाईयों पर मुलाकातों के

इल्ज़ाम बहुत हैं

यूं तो दिखता है हर कोई मशरूफ यहां

मगर फिर भी हर किसी के पास

फुर्सतों के इंतज़ाम बहुत हैं


दिल में उठते हरदम

दर्द ओ गम के तूफ़ान बहुत हैं

यूं तो दिखता है हर कोई यहां

इत्मीनान से मगर

बेचैनियों से भरे फिरते

यहां इंसान बहुत हैं


खुद ही खुद से जुदा फिरते

यहां अनजान बहुत हैं

रख कर दिल में नफरतें हज़ारों,

हमदर्दी का दिखावा करते

यहां बेईमान बहुत हैं

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