भरोसा नहीं किसी को मुझपर

तो कोई आंख मूंद कर विश्वास कर रहा है

अहमियत नहीं मेरी किसी के लिए तो कोई

हर रोज़ दुआओं में इख़्तियार कर रहा है


तन की खूबसूरती को कर परे

कोई मन की सुंदरता का श्रृंगार कर रहा है

कोई है बेवजह उकताया हुआ

तो कोई हर लम्हा इंतज़ार कर रहा है


कोई सबकुछ चाहते हुए भी है ख़ामोश

तो कोई सबकुछ पाकर भी तकरार कर रहा है

कोई है मौजूदगी से ऊबा हुआ

तो कोई गैरमौजूदगी में भी

मोहब्बत बेशुमार कर रहा है

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