ज़िन्दगी को सिर्फ मुंह फुलाने
और दांत निपोरने में मत गुजारिए
कुछ वक़्त भावों को भी पुचकारिए
क्रोध से दिमाग को मंद मत बनाइए
खुद को इसके जंजाल से बचाईए...
क्रोध रूप को कुरूप में बदल देता है
चेहरे के नूर को बेनूर कर देता है...
क्रोध ज़ुबान को तलवार बना देता है
भावनाओं को इसके प्रहार से आहत कर देता है....
रूठना और मनाना तो ज़िन्दगी का मज़ा है
लेकिन हर वक़्त गुस्सा आना तो एक सज़ा है....
गुस्से को सिर्फ मीठी नोक झोंक तक अपनाइए
और रिश्तों को इसके प्रकोप से मुक्ति दिलवाइए
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