Poetry 1 min read 785.7K reads

बंदिशें


बंदिशें तमाम हैं ,,फिर भी हौसले खुलेआम हैं...

सरहद पे पहरेदारी है,,फिर भी परिंदों की उड़ान ज़ारी है...

दिलों में दूरियां हैं,,फिर भी इश्क़ की साझेदारी है

Read more Earn more Learn more