बैठो कुछ पल
तो तुम्हें दिल का
हाल सुनाते है
उधड़े कहाँ कहाँ से
तुमको आज दिखाते हैं
पढ़ अगर जो
तुम सको तो आँखों के
राज़ दिखाते हैं
क़ैद हैं जो बरसों से
उन सपनों से मिलवाते हैं
समझ अगर जो
तुम सको तो जज़्बातों से
परिचित करवाते हैं
एहसासों के परदे को
मिलकर आज हटाते हैं
बैठो कुछ पल......
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